बहराइच हिंसा: सरफराज समेत सभी दोषियों को सजा देते वक्त अदालत ने पढ़ा मनुस्मृति का श्लोक
Bahraich हिंसा: Ram Gopal Mishra की हत्या का निर्णय देते समय न्यायाधीश पवन शर्मा ने के एक मनुस्मृति श्लोक का उल्लेख करते हुए सजा की आवश्यकता को बताया। इसके बावजूद, पुलिस के बयान और जज की टिप्पणी में अंतर देखने को मिला है। इस पोस्ट में जानें इस अभियोजन और उसके कानूनी पहलुओं के बारे में।
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| बहराइच हिंसा मे फांसी की सजा मिलने के बाद सरफराज |
दण्ड शास्ति प्रजाः सर्वा दण्ड एवाभिरक्षति।
दण्ड सुप्तेषु जागर्ति, दण्ड धर्म विदुर्वधा ।।
एक हिंदू व्यक्ति की हत्या के बारे में सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने के उद्देश्य से झूठी जानकारी, जैसे मृतक को करंट लगाना, तलवार से मारना और नाखून उखाड़ना, जैसी बाते फैला रहे है। जो सच नहीं है। "
— BAHRAICH POLICE (@bahraichpolice) October 16, 2024
लेकिन अदालत ने पुलिस के उलट दावे को स्वीकार किया। कोर्ट ने कहा कि रामगोपाल को ना सिर्फ गोली मार दी गई, बल्कि उसके पैरों को इतना जलाया गया कि उसके नाखून तक बाहर निकल गए। यानी पुलिस और अदालत की टिप्पणियों में अंतर है।
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जिस मामले में अदालत ने ये फैसला सुनाया, वह लगभग एक वर्ष से अधिक समय से चल रहा है। 13 अक्टूबर 2024 को बहराइच से 40 किलोमीटर दूर महाराजगंज बाजार में ये घटना हुई। उस दिन शाम छह बजे मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकल रहा था। मुस्लिम समाज के कुछ सदस्यों ने मस्जिद के सामने भड़काऊ गाने बजाने पर डीजे को बंद करने की मांग की। इसके बाद वातावरण गर्म हो गया। पहले कहासुनी हुई, फिर पथराव हुआ और फिर गोलीबारी हुई।
इस दौरान, अब्दुल हमीद के घर की छत पर चढ़कर रामगोपाल मिश्रा ने धार्मिक झंडा उतार दिया। उसके स्थान पर भगवा झंडा फहराया गया। मुसलमानों को इससे क्रोध आया। रिपोर्टों के अनुसार, रामगोपाल को अब्दुल हमीद और उसके बेटे सरफराज सहित अन्य आरोपियों ने अंदर घसीट लिया। उसे घर के अंदर पीटा और फिर गोली मारकर मार डाला।
Ramagopal की हत्या के बाद मामला अधिक हिंसक हो गया। रात भर भीड़ ने सड़कों पर जाम लगाए रखा। रामगोपाल की लाश के साथ सुबह प्रदर्शन किया। दुकानें, शोरूम और अस्पताल जल गए। जैसे-तैसे पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित किया और हिंसा को रोका।
अदालत ने इस मामले में मुख्य आरोपी सरफराज को मौत की सजा सुनाई है। उसके पिता अब्दुल हमीद और उसके दोनों भाई फहीम और तालिब को भी हत्या में शामिल होने के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। साथ ही, प्रत्येक दोषी को एक एक लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। तीन आरोपियों खुर्शीद, शकील और अफजल को कोर्ट ने बिना सबूतों के बरी कर दिया।

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